मध्यस्थों और पंचों के लिए पैनल में शामिल करने के मानदंड
1. आयु: 35 वर्ष से 75 वर्ष के बीच।
2. कानून, प्रतिभूति बाजार सहित वित्त, लेखा, अर्थशास्त्र, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, या प्रशासन के क्षेत्र में योग्यता।
3. अनुभव: नीचे दिए गए अनुसार न्यूनतम 7 वर्ष का अनुभव।
4. नीचे दिए गए अनुसार व्यावसायिक अनुभव पर विचार किया जा सकता है:
क. प्रतिभूति बाजार सहित वित्तीय सेवाएं यानी बैंक, एनबीएफसी, एमआईआई, प्रतिभूति बाजार के अन्य मध्यस्थ;
ख. कानूनी सेवाएं - स्वतंत्र रूप से सुलह, और/या मध्यस्थता का संचालन करने वाले प्रमाणित पेशेवर; और/या
ग. भारतीय वित्तीय क्षेत्र के नियामकों यानी, बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण, पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण, भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पूर्व अधिकारी।
5. ज्ञान और कौशल जैसे कि:
क. प्रतिभूति बाजार के कामकाज का ज्ञान;
ख. भारत में प्रतिभूति कानून और मध्यस्थता एवं सुलह कानून;
ग. अंग्रेजी भाषा में दक्षता (पढ़ना, लिखना और बोलना);
घ. एक या दो क्षेत्रीय भाषाओं में दक्षता और पढ़ने/लिखने/बोलने की क्षमता - संचार और प्रभावी विवाद समाधान के लिए आवश्यक;
ङ. कानूनी प्रारूपण (लीगल ड्राफ्टिंग) और संचार कौशल;
च. निष्पक्ष निर्णय देने के लिए आवश्यक निर्णय लेने का कौशल;
छ. पक्षों के मनोविज्ञान और सामान्य ऑनलाइन व्यवहार को समझना: विविधता और अंतर-सांस्कृतिक संचार और पेशेवर व्यवहार रखना
6. सुलहकर्ताओं और मध्यस्थों को पैनल में शामिल होने के लिए निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना चाहिए:
क. व्यक्ति की निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा की सामान्य प्रतिष्ठा और रिकॉर्ड हो, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं है:
(i) वित्तीय सत्यनिष्ठा;
(ii) अच्छी प्रतिष्ठा और चरित्र; और
(iii) ईमानदारी;
ख. व्यक्ति को किसी अदालत द्वारा नैतिक अधमता या किसी आर्थिक अपराध या प्रतिभूति कानूनों के खिलाफ किसी अपराध से जुड़े किसी भी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया हो;
ग. व्यक्ति को दिवालिया घोषित नहीं किया गया हो और यदि किया गया है, तो उसे बरी नहीं किया गया हो;
घ. बोर्ड या किसी अन्य नियामक प्राधिकरण द्वारा व्यक्ति को प्रतिभूतियों में लेनदेन करने या प्रतिभूति बाजार तक पहुंचने से रोकने, प्रतिबंधित करने या वर्जित करने का कोई आदेश पारित नहीं किया गया हो;
ङ. व्यक्ति के खिलाफ ऐसा कोई अन्य आदेश पारित नहीं किया गया हो जिसका प्रतिभूति बाजार पर कोई प्रभाव पड़ता हो;
च. सक्षम क्षेत्राधिकार की अदालत द्वारा व्यक्ति को विकृत मस्तिष्क का नहीं पाया गया हो; और
छ. व्यक्ति वित्तीय रूप से सुदृढ़ हो और उसे जानबूझकर चूक करने वाला (विल्फुल डिफॉल्टर) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया हो।
सुलहकर्ता और मध्यस्थ:
निष्पक्ष, निष्पक्ष, स्वतंत्र और वस्तुनिष्ठ तरीके से कार्य करेंगे;
ii. अपने कर्तव्यों के निर्वहन में व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा, सच्चाई, ईमानदारी और दृढ़ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे;
iii. किसी विशेष मामले में अपने हित या हितों के टकराव का खुलासा करेंगे, यानी, क्या कार्यवाही के किसी पक्ष का सुलहकर्ता और मध्यस्थ के साथ कोई लेनदेन था या वह उससे संबंधित है;
iv. अपनी जिम्मेदारियों को बदनाम करने वाले कार्यों में शामिल नहीं होंगे;
v. ऐसे किसी भी हित या गतिविधि से बचेंगे जो एक सुलहकर्ता या मध्यस्थ के रूप में उनके कर्तव्यों के संचालन के विपरीत हो;
vi. ऐसी किसी भी गतिविधि से बचेंगे जो उनकी स्वतंत्रता या वस्तुनिष्ठता को कमजोर कर सकती है, या कमजोर करती हुई प्रतीत हो सकती है;
vii. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996, सेबी अधिनियम, 1992, प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956, निक्षेपागार (डिपॉजिटरी) अधिनियम, 1996 और उनके तहत बनाए गए नियमों, विनियमों और उप-नियमों और उनके तहत जारी किए गए परिपत्रों, निर्देशों तथा संविदात्मक व्यवस्थाओं के अनुपालन में कार्यवाही का संचालन करेंगे;
viii. एनआईएसएम (NISM) सहित बोर्ड द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किए जाने वाले प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को पूरा करेंगे;
ix. मध्यस्थता निर्णय (आर्बिट्रल अवार्ड) तेजी से और निर्धारित समय के भीतर पारित करने का प्रयास करेंगे;
x. तर्कसंगत और विस्तृत मध्यस्थता निर्णय पारित करेंगे; और
xi. कार्यवाही और उससे जुड़ी रिकॉर्डिंग के संबंध में गोपनीयता बनाए रखेंगे और केवल कानून या सक्षम क्षेत्राधिकार की अदालतों या कानूनी प्राधिकरण द्वारा आवश्यक होने पर ही गोपनीय जानकारी का खुलासा करेंगे।
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